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एक दिन एक व्यक्ति की घड़ी गुम हो गई। वैसे तो घड़ी कीमती नहीं थी, पर वह उसे उसकी पत्नी ने शादी की पहली सालगिरह पर भेंट की थी। उसका उस घड़ी से भावनात्मक जुड़ाव था और वह किसी भी कीमत पर उसे वापस पाना चाहता था। उसने घड़ी को पूरे घर में खोजा, पर वह उसे कहीं नहीं मिली। इससे वह परेशान हो गया।

तभी उसे सामने मैदान में कुछ बच्चे खेलते हुए नजर आए। उसे लगा कि घड़ी खोजने में बच्चों की मदद लेनी चाहिए। उसने बच्चों को अपने पास बुलाकर कहा, 'सुनो बच्चो, मेरी घड़ी घर में कहीं गुम हो गई है। तुममें से जो कोई भी उसे खोज निकालेगा, उसे मैं 100 रुपए इनाम दूंगा।' फिर क्या था, सभी बच्चे जोर-शोर से इस काम में जुट गए। उन्होंने घड़ी को घर में हर जगह ढूंढा, पर वह उन्हें नहीं मिली। मायूस होकर जब बच्चे जाने लगे, तभी उनमें से एक लड़का उस व्यक्ति के पास आया और बोला,'काकाजी, मुझे एक मौका और दीजिए। पर इस बार मैं यह काम अकेले ही करना चाहूंगा।'

घड़ी मिलने की उम्मीद टूट चुकी थी, फिर भी उसने लड़के की बात मानते हुए हामी भर दी। इसके बाद वह लड़का घर के कमरों में एक-एक कर गया। जब वह उस व्यक्ति के शयनकक्ष से निकला तो घड़ी उसके हाथ में थी। घड़ी देख वह व्यक्ति प्रसन्न हो गया और उसने लड़के से अचरज से पूछा-'बेटा, कहां थी यह घड़ी? हम सभी नाकाम हो गए, तुमने इसे कैसे ढूंढ निकाला?' लड़का बोला, 'बस मैं कमरे में गया और घड़ी की आवाज पर ध्यान केंद्रित करने लगा। शांति होने के कारण मुझे घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे गई, जिससे मैंने उसकी दिशा का अंदाजा लगा लिया और अलमारी के पीछे गिरी इस घड़ी को खोज निकाला।'

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