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हमारा दिमाग

कभी-कभी यह ख्याल आता है कि दिमाग भी कितने काम की चीज़ है, इतना छोटा-सा होकर भी हमारे पूरे शरीर पर नियंत्रण रखता है दिमाग। दिमाग की शक्तियों का अंदाजा भी हम नहीं लगा सकते, यह हरदम हमारे लिए काम करता है। जब हमें दिमाग की जरूरत हो यह हाजिर रहता है, हर बेशक थक जाएं लेकिन दिमाग चलता रहता है। 

दिमाग कभी थकता नहीं

वो बात अलग है कि जब हम दिमागी रूप से थक चुके होते हैं तो खुद से यही कहते हैं कि आज दिमाग काम नहीं कर रहा, लेकिन हम गलत हैं। उस समय भी दिमाग चल रहा है, वह हजार तरह के ख्याल बुन रहा है। उस समय भी दिमाग में वह सभी चिंताएं, वह सभी ख्याल चल रहे हैं जिसे हम पूरा करना चाहते हैं लेकिन थकान के चलते दोष अपने दिमाग को देते हैं।

साइंस के तथ्य

क्या आप जानते हैं कि साइंस के मुताबिक इस सृष्टि में हर मनुष्य को एक जैसा दिमाग मिलता है, बस उसे कैसे इस्तेमाल किया जाए और सक्षम बनाया जाए यह भिन्न-भिन्न लोगों पर निर्भर करता है। शायद आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन यह सत्य है कि दिमाग के पास बातों को याद रखने की कोई सीमा नहीं होती।

अनगिनत बातें याद रखता है दिमाग

जी हां.... आप चाहे तो हजारों बातें, लाखों या करोड़ो बातें भी अपने दिमाग में भर सकते हैं। दिमाग कभी भी यह नहीं कहेगा कि मैं भर गया हूं और अब और बातें याद नहीं रख सकता। यह केवल हमारी मानसिक आवस्था है कि हम समय-समय पर जब बातों को दोबारा दोहराते नहीं हैं तो उन्हें भूलते जाते हैं।

सक्षम है

हमार दिमाग अनगिनत बातों को याद रख सकने में सक्षम होता है तो फिर हम बातों को भूलते क्यों जाते हैं? कुछ समय बाद नहीं, बल्कि कुछ ही पलों के बाद कई बार हम बातों को सही से याद नहीं कर पाते।

आंखों देखी बातें

साइंस का मानना है कि सुनने की तुलना में जो चीज़ें देखी गई हों वह और भी अच्छे से याद रहती हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आंखों देखी बातें भी हम कुछ ही पलों में भूल जाते हैं। पूरी तरह से नहीं तो कम से कम उन्हें उसी रूप में याद रख सकना हमारे लिए असंभव-सा हो जाता है।

याद रखने की क्षमता

आज इन बातों को सामने रखने के पीछे हमारा एक कारण है, कुछ समय पहले ही बीबीसी ऑनलाइन में प्रकाशित एक रिपोर्ट पढ़ी जिसमें यह लिखा था कि कैसे हम एक आसान तरकीब से लंबे समय तक बातों को याद रख सकते हैं। आज वही रिपोर्ट आपके साथ यहां साझा करने जा रहे हैं........

एक शोध

बीबीसी ऑनलाइन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ता क्रिस बर्ड्स ने दिमागी ताकतों पर शोध किया है। उनकी रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि आखिरकार वह क्या कारण है जिससे हम बातों को लंबे समय तक याद नहीं रख पाते।

भूलने क्यों लगते हैं

बर्ड्स का कहना है कि कई बार हम आंखों से कोई दृश्य देखते हैं, लेकिन जब दोबारा से हमसे कोई उस दृश्य की व्याख्या मांगता है तो हम उसे टूटे-फूटे अंदाज़ में बताते हैं। असल में किस घटना के बाद कौन सा पल आया हम ठीक से याद नहीं कर पाते हैं, ऐसा क्यों!

दृश्य देखने के तुरंत बाद

इसका उत्तर और साथ ही इसका समाधान निकालने के लिए भी बर्ड्स ने कुछ लोगों पर शोध किया। इस शोध के अंतर्गत उसने कुछ लोगों को ब्रेन स्कैनर के भीतर रहते हुए यूट्यूब पर कुछ वीडियो देखने को कहा। वीडियो देखने के तुरंत बाद ही कम से कम 40 सेकेंड के लिए दोबारा से उस वीडियो के दृश्यों को दिमाग में याद करने को कहा।

बड़े काम का है ये नुस्खा

इससे बर्ड्स को यह हासिल हुआ कि वीडियो देखने के तुरंत बाद ही जब लोगों ने खुद के दिमाग को ही उस वीडियो के दृश्यों को समझाया तो वे उसे और भी अच्छे से याद रखने में सफल हुए। जब उनसे थोड़ी देर बाद वीडियो के बार में पूछा गया तो बिना किसी गलती के उन्होंने वीडियो को बिल्कुल सही तरीके से समझाया।

क्या है कारण

इसका कारण बर्ड्स ने बताया कि जब वे वीडियो को देख रहे थे तो शायद उसे एंज्वाय कर रहे थे, लेकिन जब वीडियो देखने के तुरंत बाद उन्हें उसे याद करने को कहा गया था तब उन्होंने अपनी असली प्रक्रिया शुरू की। इस प्रक्रिया में उन्होंने वीडियो के एक-एक दृश्य को दिमाग में जोड़ा, उससे एक कहानी बनाई और यह कहानी अंतत: पूरी वीडियो के रूप में उनके सामने आई।

चीजों को जोड़ते हैं हम

ऐसा करते हुए वे वीडियो को कई बार अपनी खुद की लाइफ से या अपने पसंदीदा लोगों से जोड़ते हैं। जैसे कि वीडियो के किसी विशेष दृश्य में देखा हुआ इंसान यदि उन्हें किसी प्रसिद्ध कलाकार जैसा लगा, तो वे उस दृश्य को कभी भूलेंगे नहीं।

एक उदाहरण

बर्ड्स के मुताबिक बातों को याद रख सकने का यह तरीका काफी काम का है। उदाहरण के लिए यदि आप किसी दुर्घटना के इकलौते गवाह बन गए हैं, आपने वह घटना घटते हुए अपनी आंखों से देखा लेकिन धीरे-धीरे जब तक बयान देने का समय आया, आपके दिमाग में घटना संबंधी दृश्य धुंधले पड़ने लगे।

आप भी आज़माएं

यदि उस समय कोई बातों को याद करने के इस तरीके को अपनाए तो वह शायद कभी भी उस घटना को भुला नहीं सकेगा। बर्ड्स के मुताबिक घटना के तुरंत बाद केवल आधा मिनट का समय भी उस दृश्य को लंबे समय तक याद रख सकने के लिए काफी है।

प्राकृतिक उपाय

लेकिन यदि आप प्राकृतिक रूप से दिमाग तेजे करने में इच्छुक हैं, तो इसमें भी हम आपकी सहायता कर सकते हैं। उपरोक्त बताए गए उपाय तो एक शोध का आधार है, जिससे हम अपनी मेमोरी को तेज़ कर सकते हैं। लेकिन कुछ प्राकृतिक जड़ी-बूटियां भी दिमाग तेजे करने में आपकी सहायता कर सकती हैं।

हल्दी

सुंदरता या फिर खाद्य पदार्थों का स्वाद बढ़ाने के लिए हल्दी जरूर फायदेमंद है, लेकिन आप शायद ना जानते हों कि यह दिमाग भी तेज़ करती है। दबसे अच्छी बात यह है कि हल्दी अन्य जड़ी-बूटियों की तुलना में आसानी से उपलब्ध भी हो जाती है। इसे पाने के लिए तो आपको किसी प्रकार की मशक्कत करने की आवश्यकता भी नहीं है। यह आपकी किचन में ही मिल जाएगी, लेकिन इसका उपयोग केवल खाना बनाते समय ही ना करें।

मात्रा ठीक रखें

दिमाग को तेज करने के लिए भी करें। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में हुए शोध के अनुसार, हल्दी में पाया जाने वाला रासायनिक तत्व कुरकुमीन दिमाग की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को रिपेयर करने में मदद करता है और इसके नियमित सेवन से एल्जाइमर रोग नहीं होता है। इसलिए आप इसे गर्म दूध में मिलाकर पी लें, फायदा होगा लेकिन ध्यान रहे कि ऐसा रोज़ाना ना करें। क्योंकि हल्दी की तासीर गर्म होती है, जिससे पेट की परेशानियां भी उत्पन्न हो सकती हैं।

जायफल

वैसे इंडियन परिवारों में महिलाएं खाना बनाते समय जायफल का भी काफी प्रयोग करती हैं। लेकिन इसका उपयोग दिमाग तेज करने के लिए भी होता है, यह भी जान लें।

तासीर है गर्म

लेकिन हल्दी की तरह ही जायफल की भी तासीर गर्म होती है, इसलिए सही और कम मात्रा में ही इसका सेवन करना शरीर एवं दिमाग के लिए सही है। परन्तु कम मात्रा में भी यह दिमाग को तेज करने में सहायक सिद्ध होता है। इसको खाने से आपको कभी एल्जायइमर यानी भूलने की बीमारी नहीं होती।

तुलसी

इससे पहले भी हमने तुलसी के कई फायदों से आपको परिचित कराया है, आज एक और फायदा भी जान लें। तुलसी वैसे तो कई प्रकार की बीमारियों का इलाज करने में सहायक सिद्ध होती है, लेकिन साथ ही यह दिमाग को तेज करने के लिए एक जानी-मानी जड़ी बूटी भी है।

इसमें हैं एंटीऑक्सी डेंट्स

इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सी डेंट हृदय और मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह में सुधार करता है। साथ ही इसमें पाई जाने वाली एंटी-इंफ्लेमेटरी अल्जाहइमर जैसे रोग से सुरक्षा प्रदान करता हैं।
 

केसर

हम जानते हैं कि इस समय बाजार में केसर का क्या भाव चल रहा है। चुटकी भर केसर पाने के लिए भी अच्छी मात्रा में खर्चा करना पड़ता है, और वह केसर असली ही हो यह जानना भी एक कठिन कार्य ही है। 

अनिद्रा और डिप्रेशन से बचें के लिए

लेकिन परेशान ना हों, क्योंकि ज़रा-सी केसर भी आपकी मदद कर देगी। दूध में या फिर अन्य खाद्य पदार्थ में चुटकी से भी कम केसर का इस्तेमाल करने से अनिद्रा और डिप्रेशन जैसी बीमारियों से छुटकारा मिलता है। और ऐसी ही बीमारियां हमारे दिमाग को कमज़ोर बनाती हैं...

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