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रामू की माँ कितने समय से उससे कह रही थी,
कि बेटा अब तो तू शादी कर ले, मै तो बूढ़ी हो
गयी हूँ। और मेरी उमर का क्या भरोसा,
पतानहीं कब यमराज का बुलावा आ जाये। मेरे
बिना तो तू बिल्कुल अकेला हो जायेगा।
लेकिन रामू हर बार माँ को यही जवाब देता,
कि माँ जब यमराज आयेंगे , हम उन्हें भी यहीं
रोक लेंगे और कहीं नहीं जाने देंगे। और फिर तुम्हे
कोई मुझसे अलग नहीं कर पायेगा। रामू की माँ
अपने बेटे की भोली बातें सुनकर हँस पड़ती थी,
लेकिन अंदर ही अंदर उसे रामू की चिंता
सताती रहती।

एक दिन उसने रामू से कहा कि वह तब तक
खाना नहीं खायेगी जब तक रामू शादी के लिए
हाँ नहीं कर देता।

रामू को माँ की जिद के आगे
हार माननी पड़ी, लेकिन उसने माँ से शर्त
रखी, कि वो अपनी मर्जी की लड़की से ही
शादी करेगा पर माँ को लड़की ढूँढने में उसकी
मदद करनी होगी। माँ तो इसके लिये पहले ही
तैयार थी। फ़ौरन मान गयी।
रामू ने कहा कि जो भी लड़की माँ को ठीक
लगे , माँ उससे ये प्रश्न पूछे कि उसे कौन सा
मौसम सबसे अच्छा लगता है। और उसका उत्तर
वो आकर रामू को बता दे। उत्तर सुनकर ही रामू
शादी करने या न करने का निश्चय करेगा। अब
क्या था, माँ रोज शहर में निकलती और जो
लड़की ठीक ठाक लगती, उसके घर में बात करके
, उस लड़की से पूछती कि बताओ सबसे बढ़िया
मौसम कौन सा है।
किसी लड़की का जवाब होता जाड़े का
मौसम, क्योंकि जाड़ों में रजाई में बैठ कर चाय
पीने का मजा ही कुछ और है। किसी लड़की
का जवाब होता की बारिश का मौसम ,
क्योंकि बरसात में चाय के साथ गर्म गर्म पकौड़े
खाने का मजा ही कुछ और है। तो किसी को
गर्मियों का मौसम भला लगता। ये सब जवाब
माँ जाकर रामू को बताती और रामू एक एक
करके सबको मना करता जाता। अब तो माँ
फिर से परेशान रहने लगी। उसने एक एक करके
सारे मौसम बता दिए, पर रामू को तो पता
नहीं क्या सुनना था , जो वो सुंदर से सुंदर
लड़की को मौसम का नाम सुनने के बाद मना
कर देता।

रामू के घर के सामने एक मकान बन रहा था।
रामू की माँ वहाँ जाकर बैठ गयी और कुछ
सोचने लगी , कि उसकी नजर वहाँ काम करने
वाली एक ऐसी लड़की पर पड़ी जो अपने भाई
को पढ़ाते पढ़ाते मजदूरी का काम भी कर रही
थी। माँ को वो लड़की बड़ी समझदार लगी।
माँ उस लड़की के पास गयी और उससे पुछा, कि
बताओ सबसे बढ़िया मौसम कौन सा है।
लड़की बोली माँ जी जिस मौसम में मै और
मेरा परिवार सुख शांति से रहे वही मौसम मेरे
लिए सबसे बढ़िया है। माँ को ये जवाब सुन कर
बड़ा आश्चर्य हुआ, क्योंकि ऐसा जवाब तो उसे
पहले किसी से नहीं मिला था।

माँ घर वापिस आ गयी। उसने रामू को बताया
कि सामने एक लड़की जो इतनी सुंदर नहीं है,
पहले देखी लड़कियों से कम ही सुंदर है,
पर जब मैंने उससे तुम्हारा सवाल पूछा, तो उसने
कहा कि जिस मौसम में मै और मेरा परिवार
सुख शांति से रहे वही मौसम मेरे लिए सबसे
बढ़िया है।
रामू ये सुनकर बोला, माँ मै इसी जवाब का
इन्तजार कर रहा था , मौसम कोई भी हो, जब
तक घर में सुख शांति नहीं , किसी मौसम में हम
खुश नहीं रह सकते।

ये सुनकर माँ की बाँछे खिल गयीं, उसे अपने बेटे
की समझदारी पर बड़ा गर्व हुआ।
और वह उस लड़की के माता पिता से उस लड़की
का हाथ मांगने निकल पड़ी।
रामू भी आज संतुष्ट था,
उसे तन से नहीं बल्कि मन से एक सुंदर साथी
की तलाश थी,
जो अब उसे मिल गया था।

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