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यह कहानी छोटे छोटे मेंढकों की है जो एक साथ एक जगह पर झूंड बना कर रहते थे.एक बार उन्होंने एक "प्रतियोगिता" का आयोजन करने की ठानी.लक्ष्य रखा गया एक ऊंचा सा बिजली का टावर और तय किया गया कि जो भी उस पर सबसे पहले चढ जायेगा वही विजेता घोषित होगा.एक बार उन्होंने एक "प्रतियोगिता" का आयोजन करने की ठानी.लक्ष्य रखा गया एक ऊंचा सा बिजली का टावर और तय किया गया कि जो भी उस पर सबसे पहले चढ जायेगा वही विजेता घोषित होगा.प्रतियोगिता शुरू हुई.
 देखने वालों में से किसी को भी विश्वास नहीं था कि कोई भी मेंढक उस ऊंचे टावर पर चढ पायेगा.

भीड चिल्ला रही थी.. बहुत मुश्किल है... शायद ही कोई ऊपर तक पहुंच पाये.

कुछ कह रहे थे सफ़लता का प्रतिशत शून्य है क्योंकि टावर बहुत ऊंचा है.

बहुत से मेंढकों ने थक कर प्रतियोगिता छोड दी, कुछ बचे हुए अभी भी टावर पर चढ रहे थे.

भीड की बातें सुन कर एक को छोड कर सभी मेंढकों ने हार मान कर प्रतियोगिता बीच में ही छोड दी.

एक अकेला मेंढक तेजी से टावर पर चढता जा रहा था.
उसके प्रयास में कोई कमी नहीं आ रही थी और अन्त में वह टावर पर चढने में सफ़ल रहा.

सब मेंढक यह जानना चाह रहे थे कि यह कैसे संभव हुआ. एक प्रतियोगी मेंढक ने विजेता मेंढक से प्रश्न किया कि आखिर तुम्हारी जीत का क्या राज है ?
तब सब को पता चला कि विजेता मेंढक "बहरा" था वह सुन नहीं पाता था.



"दूसरे व्यक्तियों की नकारात्मक सोच पर कभी ध्यान न दें क्योंकि वह आपके सुनहरे स्वप्नों को साकार करने में बाधा से अधिक कुछ नहीं. शब्दों की शक्ति को पहचाने और उन्हें अपने प्रयत्नों पर हावी न होने दें. सदा साकारात्मक सोच ले कर लक्ष्य की और बढें. स्वंय पर विश्वास रखें आप सब से ऊपर पहुंचने में सफ़ल होंगे.

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