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जी हां, हकलाकर या अटककर बोलने की वजह का पता चल गया है। इसका सीधा संबंध ब्रेन (मष्तिष्क) सर्किट में बदलाव से है। बोलने, ध्यान और भावनाओं का नियंत्रण यही से होता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने अपने तरह के पहले अध्ययन में प्रोटोन मैग्नेटिक रिस्पांस स्पेक्ट्रोस्कोपी (एमआरएस) का इस्तेमाल किया।

उन्होंने एमआरएस के उपयोग से हकलाकर बोलने वाले वयस्कों और बच्चों की मष्तिष्क का अध्ययन किया। अटक या रुककर बोलने को न्यूरोसाइकिट्रिक अवस्था कहा जाता है जिसकी उत्पत्ति मष्तिष्क में होती है। हालांकि इसके बारे में अभी तक बहुत ज्यादा जानकारी नहीं थी। नए अध्ययन में हकलाकर बोलने से जुड़े सर्किट और मष्तिष्क के प्रभावित भाग में तंत्रिका घनत्व को मापा गया।

चिल्ड्रेन्स हास्पिटल लॉस एंजिलिस के शोधकर्ता ब्रेडली एस पीटरसन ने कहा कि यह साफ हो गया है कि हकलाने का संबंध बोलने और भाषा आधारित ब्रेन सर्किट से है। इसमें बदलाव होने से हकलाने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

Source by NBT

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