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कर्नल सैंडर्स एक ऐसे इंसान थे जो जीवन भर संघर्ष करते रहे। जब वह 5 साल के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया। 16 साल की उम्र में उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। 17 साल की उम्र तक उन्हें 4 नौकरियों से निकाला जा चुका था। 18 से 22 वर्ष की उम्र के बीच कंडक्टर की नौकरी की। आर्मी में गए तो वहां से भी निकाल दिया गया। लॉ स्कूल में दाखिला लेने गए, रिजेक्ट कर दिया गया। ऐसी ही तमाम नाकामियों के बीच नौकरी की। रिटायर होने के बाद भी निराशा ने साथ नहीं छोड़ा।

रिटायरमेंट के बाद सरकार की ओर से मात्र 7000 रुपये का चेक मिला। हताशा में आकर आत्महत्या तक की कोशिश की। लेकिन एक बार एक पेड़ के नीचे बैठकर अपनी जिंदगी के बारे में लिख रहे थे तो अहसास हुआ कि अभी बहुत कुछ करना बाकी है। यही पल जिंदगी का अहम मोड़ बना। वे अच्छे कुक तो थे ही। इसी गुण का इस्तेमाल करने की सोची। उन्होंने 7000 में से 5000 रूपये निकाले और कुछ चिकन फ्राई करके उसे गली-गली घूम कर बेचने लगे। उनका चिकन काफी पसंद किया गया। दोगुने उत्साह के साथ वे इसी काम को आगे बढ़ाने में लग गए। उनका काम बढ़ते-बढ़ते दुनिया भर में फैल गया।

यही सैंडर्स केंटुकी फ्राइड चिकन (केएफसी) फूड चेन के मालिक के रूप में मशहूर हुए। आज दुनिया भर में केएफसी के होटल हैं। केएफसी एक बहुत बड़ा ब्रांड बन चुका है। कर्नल सैंडर्स का संघर्ष वास्तव में दिल दहला देने वाला है। एक इंसान जिसने 65 वर्ष की उम्र में जीवन समाप्त करने की कोशिश की, वही 88 साल की उम्र तक अरबपति बन गया। उनका जीवन संदेश देता है कि कभी निराश न हो, अंतिम सांस तक प्रयास करो। सफलता का एक ही मंत्र है - गिरो, उठो, फिर गिरो, फिर उठो... मगर हार मत मानो।

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