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बाॅलीवुड से जुड़े कुछ ऐसे शख्सियत हैं जिन्होंने अपनी जिस्मानी कमी को सपनों की राह में रोड़ा बनने नहीं दिया. उसे स्वीकारते हुए दुनिया के सामने अपनी कला और काबिलियत का परिचय दिया है.
ये बात हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हाल ही बाहुबली-2 में भल्लाल देव की दमदार भूमिका निभाने वाले राणा दग्गुबाती ने अपनी जिंदगी से जुड़े एक सच का खुलासा किया.

ऐसे तो 'बाहुबली' का एक-एक किरदार सुर्खियों में है, लोगों के मन में बस चुका है. लेकिन फिल्म में विलेन होने के बावजूद राणा दग्गुबाती की एक्टिंग और मस्कुलर लुक ने आॅडियंस को उनका फैन बना दिया है.
उन्होंने एक इंटरव्यू में अपनी जिंदगी से जुड़े सच का खुलासा करते हुए बताया कि वो एक आंख से नहीं देख सकते.

राणा दग्गुबाती



राणा ने ये बात एक तेलुगू चैट शो के दौरान बताई. राणा ने शो में कहा, 'आपको एक बात बताऊं? मैं अपनी एक आंख से देख नहीं सकता, मैं सिर्फ बायीं आंख से देख सकता हूं. ये जो दूसरी आंख आप देख रहे हैं ये किसी और की है. यह मुझे उनकी मौत के बाद डोनेट की गई थी. अगर मैं अपनी बायीं आंख बंद कर लूं तो मुझे कुछ दिखाई नहीं देगा.'
उन्होंने आॅडियंस से कहा कि नहीं देख पाने की वजह से किसी को अपनी जिंदगी किसी डर में नहीं बितानी चाहिए.

ऋतिक रोशन



ऋतिक रोशन को बचपन में हकलाने की बीमारी थी. अपनी इसी बीमारी के चलते ऋतिक अक्सर स्कूल जाने से भी कतराते थे और स्कूल न जाने के लिए कई बहाने भी बनाते थे.
हालांकि बचपन की इस बीमारी को ऋतिक ने स्पीच थैरेपी के जरिए ठीक भी कर लिया. एक इंटरव्यू में ऋतिक ने कहा भी था कि -हकलाना मेरे लिए परेशानी नहीं कलंक था. लेकिन मैं उन सारी समस्याओं का शुक्रगुजार हूं जो मेरी जिन्दगी में आईं.आज मैं मजबूत हूं तो उन्हीं की वजह से हूं.

अभिषेक बच्चन



बचपन में अभिषेक बच्चन डिस्लेक्सिया से पीड़ित थे. ऐसे बच्चे ठीक से शब्दों की पहचान नहीं कर पाते और कई बार समझाने के बावजूद भी गलत ही लिखते हैं.
इसके बारे में आमिर खान की फिल्म तारे जमीन पर से पता चला था. आमिर खान, जिन्होंने फिल्म में एक टीचर का रोल किया था. फिल्म के एक सीन में अभिषेक बच्चन की तस्वीर दिखाते हुए एक बच्चे को बताते हैं- “आप तो इनको जानते ही होंगे, इन्हें भी पढ़ने में प्राॅब्लम होता था. लेकिन देखो आज दुनिया में धूम मचाए हुए हैं.”

सुधा चंद्रन


थोड़ा पीछे जाएं तो हमें सुधा चंद्रन और रवींद्र जैन जैसे कलाकारों के उदाहरण मिल जाएंगे. उन्होंने शारीरिक रुप से अक्षम होने के बावजूद दुनिया में नाम कमाया.
मशहूर भरतनाट्यम डांसर और अभिनेत्री सुधा चंद्रन ने जयपुर फुट के सहारे 'नाचे मयूरी' फिल्म में अपने नृत्य से सबका मन मोह लिया था. उन्होंने साढ़े तीन साल की उम्र से डांस करना सीखा था लेकिन साल 1981 में 16 साल की उम्र में एक्सीडेंट में सुधा ने अपना एक पैर खो दिया.

रवींद्र जैन



70 से 80 के दशक में भारतीय सिनेमा में एक से बढ़ कर एक हिट म्यूजिक देने वाले गीतकार-संगीतकार रवींद्र जैन का निधन हो चुका है. लेकिन ये मिसाल बनकर जिंदा हैं. दृष्टिहीन रूप से पैदा हुए जैन ने बहुत कम उम्र से गाना शुरू कर दिया था.
70 से 80 के दशक में भारतीय सिनेमा में एक से बढ़ कर एक हिट म्यूजिक देने वाले गीतकार-संगीतकार रवींद्र जैन का निधन हो चुका है. लेकिन ये मिसाल बनकर जिंदा हैं. दृष्टिहीन रूप से पैदा हुए जैन ने बहुत कम उम्र से गाना शुरू कर दिया था.

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