0





आज पूरी दुनियाँ मे उच्च रक्त चाप यानि की hypertension एक गंभीर समस्या बनी हुई है। आम भाषा में हम इसे उच्च रक्त चाप (BP) कहते है। यह एक जानलेवा बीमारी है। उच्च रक्तचाप संबंधी आपात स्थिति”, जिसको पहले “घातक उच्च रक्तचाप” कहा जाता था, तब होती है जब गंभीर रूप से ऊंचे रक्तचाप के परिणाम स्वरूप एक या एक से अधिक अंगों में प्रत्यक्ष क्षति के प्रमाण मिलते हैं। इस क्षति में मस्तिष्क में सूजन और शिथिलता के कारण होने वाला
उच्च रक्तचाप से ग्रस्त एन्सेफोलोपेथी, शामिल हो सकता है जो सिर दर्द और चेतना के परिवर्तित स्तर द्वारा इसे पहचाना जाता है। रेटिना के पापेलोडेमा और बुध्न संबंधी हेमरेज और धीमा स्राव लक्ष्य अंग क्षति के अन्य संकेत हैं। सीने में दर्द हृदय की मांसपेशीय क्षति (जो रोधगलन को बढ़ावा दे सकता है) या कभी-कभी महाधमनी विच्छेदन, महाधमनी की भीतरी दीवार में फटन का संकेत हो सकता है। श्वास की कमी, खाँसी, कफ और खून से सने हुये थूक की समस्या फेफड़े की एडीमा के लक्षण हैं। यह स्थिति, दिल के बाएं वेंट्रिकल की अक्षमता के कारण फेफड़े के ऊतकों में सूजन की है जो हृदय के बाएं वेंट्रिकल द्वारा फेफड़ों से धमनियों की प्रणाली में पर्याप्त रूप से रक्त पंप करने की अक्षमता है। गुर्दे की कार्य प्रणाली में तेजी से ह्रास (गुर्दे की तीव्र चोट) और माइक्रोएंजियोपैथिक हीमोलिटिक एनीमिया (रक्त कोशिकाओं का विनाश) भी हो सकती है।

उच्च रक्त चाप एक शांत ज्वालामुखी की तरह है जिसमे बाहर से कोई लक्षण या खतरा नहीं दिखाई नहीं देता पर जब यह ज्वालामुखी फटता है तो हमारे शरीर पर लकवा और हार्ट अटैक जैसे गम्भीर परिणाम हो सकते है। पहले यह माना जाता था की यह समस्या उम्रदराज लोगो की समस्या है लेकिन बदलते माहौल मे उच्च रक्तचाप की समस्या बच्चो और युवाओ मे भी फैलती जा रही है।

क्या होता है रक्तचाप (BP)-धमनियो मे रक्त के दबाव को बढ़ने को Blood Pressure कहते है । धमनिया शरीर मे रक्त वाहिकाए होती है जो हृदय से रक्त को सभी अंगो तथा ऊतको (tissue) तक पहुंचाती है।
रक्त के दबाव को मापने-रक्त चाप को मापने की इकाई मिलीमीटर/मर्करी(mm.Hg) है। इसे रक्त दाब मापी से मापा जाता है। Blood Pressure को दो संख्याओ मे मापा जाता है। उदाहरण के तौर पर व्यसक का Blood Pressure 120/80 mm/Hg माना जाता है। जबकि इसका माप 140/90 mm/Hg हो तो इसे उच्च रक्त चाप माना जाता है।

हाइपरटेंशन उच्च रक्तपात दबाव के क्या लक्षण है-Hypertension का ज़्यादातर लोगो में कोई खास लक्षण नहीं होते है। कुछ लोगो में ज्यादा Blood Pressure बढ़ जाने पर सरदर्द होना, ज़्यादा तनाव, सीने में दर्द या भारीपन, सांस लेने में परेशानी, अचानक घबराहट, समझने या बोलने में कठिनाई, चहरे, बांह या पैरो में अचानक सुन्नपन, झुनझुनी या कमजोरी महसूस होना या धुंदला दिखाई देना जैसे लक्षण दिखाई देते है। जीवन चर्या एवं खान-पान में अपेक्षित बदलाव कर इस रोग को पूरी तरह नियंत्रित किया सकता है।

क्यो होता है HYPERTENSION –आनुवंशिकता(heredity)- आनुवंशिकता Hypertension का मुख्य कारण है। अगर किसी परिवार मे उच्च रक्त चाप की समस्या होती है तो उनकी अगली पीड़ी भी इस समस्या से ग्रस्त हो जाती है। यह व्यक्तियों के जींस का एक पीड़ी से दूसरी पीड़ी मे स्थानान्तर होने की वजह से होता है।

1 मोटापा
2तनाव(टेंशन)
3 महिलाओं में हार्मोन परिवर्तन
4 ज्यादा नमक उपयोग करना

अब यहां ऐसे सरल घरेलू उपचारों की चर्चा की जायेगी जिनके सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने से बिना गोली केप्सुल लिये इस भयंकर बीमारी पर पूर्णत: नियंत्रण पाया जा सकता है-

5 सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रोगी को नमक का प्रयोग बिल्कुल कम कर देना चाहिये। नमक ब्लड प्रेशर बढाने वाला प्रमुख कारक है। उच्च रक्तचाप का एक प्रमुख कारण है रक्त का गाढा होना। रक्त गाढा होने से उसका प्रवाह धीमा हो जाता है। मोटापा शोध एवं अनुसंधानो से स्पष्ट हो चुका है की मोटापा उच्च रक्त चाप का बहुत बढ़ा कारण है। एक मोटे व्यक्ति मे उच्च रक्त चाप का खतरा एक समान्य व्यक्ति की तुलना मे बहुत बढ़ जाता है।व्यायाम की कमी खेल-कूद, व्यायाम, एवं शारीरिक क्रियाओ मे भाग न लेने से भी उच्च रक्त चाप का खतरा बढ़ जाता है।आयु- जैसे जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है रक्त वाहिकाओ मे दिवारे कमजोर होती जाती है जिससे उच्च रक्त चाप की समस्या पैदा हो जाती है।हृदयघात, हृदय की बीमारियाँ, गुर्दो का फ़ेल होना, रक्त वाहिकाओ का कमजोर होना आदि बीमारियो के कारण उच्च रक्त चाप हो जाता है।इन कारणो के अलावा अधिक नमक का सेवन और अत्यधिक मात्रा मे अल्कोहल, धूम्रपान अवम कॉफी का सेवन करने से उच्च रक्त चाप की समस्या पैदा हो सकती है।

कैसे बचे

HYPERTENSION-उच्च रक्त चाप के लक्षण कई सालो और दशको तक दिखाई नहीं देते। इसलिए इसे silent killer भी कहा जाता है। इससे बचने के लिए व्यक्ति को समय समय पर अपने रक्त-दबाव का मापन करवाते रहना चाहिए। यदि सही समय पर इसका इलाज न करवाया गया तो उच्च रक्त चाप को नियंत्रित करने के लिए दवाइयो का सहारा लेना पढ़ता है। दवाओ का नियमित सेवन करने से व्यक्ति की जीवन शैली बदल जाती है। उच्च रक्त चाप से बचाव के लिए कुछ उपायो का वर्णन नीचे किया गया है।मोटापे को नियंत्रित करने, नियमित व्यायाम करने, गहरी नींद लेने, तनाव मुक्त रहने और उचित आहार लेने से उच्च रक्त चाप को नियंत्रित किया जा सकता है।

ज्यादा अल्कोहल, धूम्रपान का प्रयोग और नाशिली दवाओ का सेवन करने से उच्च रक्त चाप के होने की संभावना होती है अत: इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि आप मधुमेह के रोगी है तो शुगर को नियंत्रित करे। तनाव से बचना चाहिए और खुश रहने की आदत डालनी चाहिए। गहरी नींद लेनी चाहिए।उच्च रक्त चाप से बचने के लिए भोजन का बहुत महत्व है अगर उचित भोजन लिया जाए तो इससे बचा जा सकता है। भोजन मे नमक की मात्रा कम हो। पोटैशियम को उचित मात्रा मे लेने से उच्च रक्त चाप का स्तर अच्छा हो जाता है। इसके अलावा आहार मे फल जैसे केला, संतरा, नाशपाती, टमाटर, सूखे मटर, बादाम और आलू अवश्य शामिल करे क्योकि इनमे पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है। चिकनाई या fat वाला खाना कम मात्रा मे खाये। हर इंसान को 30 साल की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार अपने रक्तचाप को माप करवाना चाहिए।

संदर्भ पढ़ें

आपको पोस्ट पसंद आई हो तो Youtube पर क्लिक करके Subscribe करना ना भूलें

आपको पोस्ट कैसी लगी कोमेन्ट और शॅर करें

Post a Comment

 
Top