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कम्युनिकेशन एक सीखने वाली कला है और अपने सहज भाव में ही यह सबसे अधिक प्रभावी दिखती है। उदाहरण के लिए स्वतः स्फूर्त तौर पर दी गई स्पीच का औपचारिक तौर पर दिए गए भाषण से अधिक असर होता है। बेशक एक असरदार कम्युनिकेटर के तौर पर अपने हुनर को चमकाने के लिए किसी को भी समय लगता है, परंतु सहज और प्राकृतिक कम्युनिकेशन के लिए किया गया अधिकाधिक अभ्यास अंततः काम आता है। असरदार कम्युनिकेशन व्यक्ति या परिस्थिति को समझने में मदद करता है। इसके जरिए आपसी मतभेद दूर होता है, भरोसा और आदर बढ़ता है। इसमें उच्चारित शब्द और भाव बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं, जिनके जरिए रचनात्मक विचार पनपते हैं, समस्याएं सुलझती हैं और सहयोग बढ़ता है। ध्यान रखना चाहिए कि व्यक्ति और परिस्थितियों के आधार पर ही कम्युनिकेशन का पैमाना तय होता है। कुछ इसी तरह स्पष्ट और असरदार लेखन क्षमता भी कुशल कम्युनिकेशन की पहचान बनती है, वहीं कमजोर लेख पढ़ने वाले के लिए रुकावट बनते हैं। उदाहरण के लिए नवयुगीन संचार माध्यमों में ईमेल और सोशल मीडिया में कई बार लिखे गए शब्दों की गंभीरता को समझने में गलती होती है। इसलिए अपनी भाषा, भावों के साथ-साथ व्याकरण को भी स्पष्टता दें, वैसे भी जीवन में किसी भी विषय पर लिखने से पूर्व कुछ देर तक अपने विचारों को सहेजना जरूरी होता है।


1. प्रोटोन की तरह सकारात्मक बने

प्रोटोन कभी अपनी सकारात्मकता (धनात्मकता) नहीं खो सकता है और वैसे ही आप भी कभीनहीं! ये बस तनाव से ढक सकता है और तनाव आपकी ऊर्जा खींच लेता है । सकारात्मकरहकर आप कठिन से कठिन चुनौतियों को पार कर जाते है और साथ ही और अधिक सकारात्मकता और संभावनाओं को अपनी ओर आकर्षित करते है ।

2. अधिक जोशीले हों

किसी काम को कराने का सबसे अच्छा तरीका है उसके लिए अधिक से अधिक जोशीला होना । जब आप पूरे जोश के साथ प्रयास करते हैं तब जीवन में श्रेष्ठता को स्वतः उपलब्ध होते हैं ।

3. भावनाओं को सावधानी के साथ संभालें

जिंदगी जब आपको रोलर कोस्टर की सैर कराये तो उसका पूरा आनंद लेना न भूलें । अपनीभावनाओं को परिस्थितियों पर राज करने न दें बल्कि उनको काबू में रखें। ये आपको चुनौतियोंके समय शांत व एकाग्र रखेगा ।

4. स्वयं पर और औरों पर करुणा करें

अधिक करुणामय हों। अगली बार जब आप या कोई और गलती करें तो मन में कोई गांठ नबांधें, जाने दें। इस बात को समझे कि हम सभी विकसित हो रहे हैं और कोई भी पूर्ण नहीं है । ये नजरिया स्वयं को और औरों को स्वीकारने में मदद करता है।

5. प्रसंशा करें

जब हम किसी के गुणोंकी की प्रसंशा पूर्णता के भाव से करते हैं, तो हमारी चेतना का विस्तार होताहै, जो हमारे भीतर उत्साह और ऊर्जा का संचार करता है । वे गुण हमारे भीतर भी विकसितहोने लगते है और हम बेहतर मानव बनते हैं।

6. प्रभावशाली संवाद करें

हम लोगों से संवाद मुख्यतया या तो अपनी उपस्थिति से या फिर अपनी भावनाओं कीअभिव्यक्ति से करते हैं । अपने संवाद में स्पष्टता लाते ही आप देखेंगें की लोग बेहतर प्रतिक्रियादे रहे हैं और अधिकतर जो आपके लिए लाभकारी भी है ।

7. खतरों का सामना साहस से करें

यदि आप मुसीबत के समय उसको चुनौती देने के लिए उठ खड़े होते हैं तो आपके मुसीबत के पार जाने की सम्भावना अधिक होती है । किसी दबाव के आगे झुके नहीं बल्कि पूरे विश्वास सेउसका सामना करें । इसमें या तो आप विजयी होंगे या फिर जीवन के लिए कुछ अमूल्य सीखेंगें।

8. जीवन में धीरज अपनाये

जीवन में विजेता होने के लिए धीरज एक गुप्त घटक है । भड़भड़ाहट और अधीरता से की प्रतिक्रिया फायदे से ज्यादा हानि पहुंचाती है। ध्यान रहे, हमें शांति और धीरज रखनी चाहिए, जिससे हम तनाव रहित होकर समझदारी से भरे त्वरित निर्णय ले सकेगें।

9. सही साँस लेने की कला सीखे

अंतिम, पर सबसे महत्वपूर्ण, सही साँस लेना सीखें। अक्सर इस बात को अनदेखा कर देते है कि सही साँस लेने से आप एक तनाव रहित और सकारात्मक जीवन पा सकते हैं। सुदर्शन क्रिया सीखे और साँस की छुपी शक्ति का उपयोग करें । साँस की इस प्रभावी तकनीक से आप शारीरक, मानसिक और भावनात्मक तनावों से मुक्त होते हैं।
जब आप सुदर्शन क्रिया सीखकर सही साँस लेते है तब आप अपने आपसी संबंधों के सुधार का तरीका पा जाते हैं और अपने व्यक्तित्व के आकर्षक पहलू को और निखारते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु

- सकारात्मक और स्पष्ट कम्युनिकेशन का एक रहस्य 

आत्मसम्मान और आत्मविश्वास से भी जुड़ा होता है। अपने व्यक्तित्व के इन दोनों पक्षों को समझ कर कार्य में ही नहीं, जीवन के प्रत्येक पक्ष में सकारात्मक दृष्टिकोण से काम किया जा सकता है। 

- कुशल कम्युनिकेशन स्किल अपने कहे पर अडिग रहने से भी मजबूत होती है। यह पक्ष आत्मविश्वास के जरिए मजबूत होता है।

 - तनाव, अवसाद या क्रोध के समय कम्युनिकेशन असरदार नहीं होता। कार्यस्थल पर इन नकारात्मक पक्षों से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए।

- अपने सहकर्मी या बॉस की बात सुनते समय उसी समय दोहराने की आदत इस ओर इशारा करती है कि आपने उनकी बात को गौर से सुना और समझा है। इससे दोनों पक्षों को किसी किस्म की उलझन को सुलझाने में सहूलियत होती है। 

- इसी तरह नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन यानी शब्दहीन संवाद के दौरान Body Language, चेहरे के भावों, इशारों, आंखों के संपर्क, बैठने के तरीके, मांसपेशियों के तनाव और सांस लेने-छोड़ने को समझना भी कुशल कम्युनिकेशन का जरूरी अंश होता है। 

- सार्वजनिक स्थानों, बसों, ट्रेन, कैफे, रेस्तराओं में बैठे लोगों को देख कर या मूक चलचित्रों के जरिए मूक संवाद को समझने का अभ्यास किया जा सकता है।

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