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दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक वे जो कहते हैं कि I CAN”T और दूसरे वे जो I CAN के सिद्धांत को मानते हैं। I CAN का सिद्धांत मानने वालों के लिए किसी भी चैलेंज को स्वीकार करना या लाइफ में रिस्क लेना मुश्किल नहीं होता है, और वही लोग जीवन में सफलता की बुलंदियों को छू पाते हैं। हमें अपनी सोच या attitude हमेशा सकारात्मक रखनी चाहिए।


कई बार हम सोच या नजरिये की बात करते हैं, हम सबने अपनी सोच की शक्ति के बारे में सुना है, और ये हमारी सोच ही है, जो हमारी सफल होने की संभावना को निर्धारित करती है। हम जानते हैं कि सकारात्मक सोच जीवन के कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जबकि नकारात्मक सोच स्वयं ही हमारे जीवन को तबाह कर देती है। आमतौर पर सकारात्मक सोच हमें हमेशा खुश रखती है, और सफलता की ओर ले जाती है। जबकि नकारात्मक सोच हमें दुखी, उदास, तनावपूर्ण, और जीवन से छुटकारा पाने के विचार की ओर ले जाती है। इसलिए अच्छी और रचनात्मक सोच सफलता और उपलब्धियों के लिए बहुत जरूरी है।

हम कैसे ऐसी आदतें विकसित करें, जो हमारी सोच को सकारात्मक बनाने में मदद करे?

सबसे पहले आइये जानते हैं कि, सोच या attitude क्या होता है।

सोच क्या है?

मनोविज्ञान में सोच या नजरिया या रवैया किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना के पक्ष या विपक्ष में भावना की अभिव्यक्ति है।

दूसरे शब्दों में, सोच किसी व्यक्ति या वस्तु के बारे में सोचने या विचार करने का एक स्थाई तरीका है।
Positive attitude- सकारात्मक विचार, सकारात्मक भावना, और सकारात्मक अभिव्यक्ति होती है।
Negative attitude- नकारात्मक विचार, नकारात्मक भावना और नकारात्मक अभिव्यक्ति होती है।
Sakaratmak Soch (Positive Thinking)
जब भी खिड़की से बाहर देखें तो कीचड़ को नहीं, आसमान के तारों को देखें—यही है सकारात्मक सोच। सकारात्मक सोच आदमी का वह ब्रह्मास्‍‍त्र है, जो उसके मार्ग के सभी व्यवधानों व बाधाओं को समाप्‍त कर उसकी सफलता का मार्ग प्रशस्त कर देता है। याद रखें—एक नकारात्मक विचार हमारे अनेक सकारात्मक विचारों को समाप्‍त कर देता है, उनका दमन कर देता है। निराशा मनुष्य को शिथिल कर देती है, तोड़कर रख देती है; वहीं एक छोटी सी सफलता का सकारात्मक विचार मन में उमंग एवं उत्साह का संचार कर देता है।
आज की आपाधापी भरी जिंदगी में सभी लोग तरह-तरह की स्पर्धाओं और चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में महत्त्वपूर्ण आवश्यकता सकारात्मक दृष्‍टिकोण तथा सोच के साथ आगे बढ़ने की है। सकारात्मक सोच व्यक्‍ति की जीवनशैली और फिर दृष्‍टिकोण को बदल देती है; इससे व्यक्‍ति की सफलता के सारे द्वार खुल जाते हैं।
 
कैसे पाएं सकारात्मक सोच :-

आइये नीचे हम आपको कुछ ऐसी आदतों के बारे में बताते हैं, जो आपको अपनी सोच को सकारात्मक बनाने में मदद कर सकती है।
 
1.अहसानों (greatfullness) की एक डायरी बनाएं :

कोई एक बुरी घटना एक क्षण में आपका पूरा दिन खराब कर सकती है, या किसी के साथ कोई झगड़ा या बहस हमारी खुशियों को उस दिन कम देता है। जब भी आपको लगे कि आपके मन में नकारात्मक भावनाएं आपको परेशान कर रही हैं तो इन्हे नियंत्रित करने के लिए एक डायरी में उस दिन की 5 ऐसी बातों या घटनाओं को लिख डालिये जब आपने कृतज्ञता या अहसानमंद होने की भावना महससू करी, और आप देखेंगे कि कैसे आपका नजरिया बदल जाता है। ये देखा गया है कि प्रशंसा से आप खुश होते हैं और चिंता, नकारात्मकता और तनाव की भावनाएं आपके पास नहीं आने पाती।
 
2.अपनी चुनौतियों का सामना नए तरीके से करें:

हमे अपनी पुरानी सोच कि, ये काम बहुत कठिन है यह नही हो सकता। .....इन बातों के स्थान पर, यह हो जायगा, ये मैं कर सकता हूँ जैसी भावना लाएं। हो सकता है ऐसी बहुत सी चीजे हों जिन पर हमारा पूरा नियंत्रण ना हो लेकिन यदि हम अपनी पूरी सामर्थ्य और मन को उस काम करने में लगाते हैं तो हमें बाद में कोई पछतावा नही रहता। चुनौतियों का सामना साहस के साथ करो ना कि विकास के अनुभव में रुकावट की तरह ।
 
3.REJECT होने पर भी अच्छा महसूस करें:

रिजेक्शन एक कला है, जिससे हमें अपनी असफलताओं को समझने और कमियों को सुधारने का मौका मिलता है, क्योंकि जीवन में कोई भी बिना रिजेक्शन के आगे नही बढ़ता है। इसलिए reject होने पर परेशान ना हों और बुरा होने की आशा कभी मत करें। यदि बुरा होने का इंतजार करेंगे, तो बुरा होने की संभावना होती है। इसलिए हमेशा ये सोच रखिये कि reject हो गया तो क्या हुआ, मैं स्वयं की कमियों का सुधार करूंगा, सबठीक है, और मेरे पास अगला मौका है।
 
4.अपने जीवन का वर्णन सकारात्मक शब्दों से करें:

हमारी सोच से ज्यादा प्रभावी हमारे शब्द होते हैं। आप वो हैं जो आप अपने बारे में सोचते हैं। आप अपने जीवन के बारे में जो बोलते हैं, वैसा ही आपका जीवन होता है। जो भी आप बोलते हैं आपका दिमाग वही सुनता है। इसलिए हमेशा अपने लिए अच्छे, सरल और सुंदर शब्दों का प्रयोग करें आप देखेंगे आपका जीवन एक अलग तरह के प्रकाश से चमक उठेगा। आपने अपने जीवन के लिए जो मार्ग चुना है उसमे आपको अधिक आनंद मिलेगा। हमेशा अपने शब्दों में सकरात्मक रहें। उदाहरण के लिए जब भी सम्भव हो अपने आप से कहें-मैं सम्पूर्ण हूँ मैं खुश हूँऔर मैं सकारात्मक हूँ 
 
5.Negative  या प्रश्नवाचक शब्दों को सकारात्मक शब्दों से बदलिये:

हम अक्सर नकारात्मक या प्रश्नवाचक शब्दों का प्रयोग करते हैं जैसे -मुझे यह काम करना है, पानी का गिलास आधा खाली है, आदि-आदि। इसके बदले में  सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करें। जैसे मुझे यह कार्य करने का अवसर मिला, पानी का ग्लास आधा भरा हुआ है।  आपका रवैया आपके कामों को पूरा करने, उसमें प्रशंसा पाने में तेजी से बदलाव लाता है, और हम वैसा पाते हैं जैसा हम चाहते हैं।
 
6.कोशिश करें कि अपने आपको, दूसरों की शिकायतों में घसीटने का मौका न दें:-

आपका दिन बहुत अच्छा जा रहा है, और आप बहुत अच्छा काम कर रहे है और आपके सहयोगी इस शानदार माहौल पर पकड़ ढीली नहीं करना चाहते हैं। आपको पता भी नहीं चलेगा और अचानक  वह आपको शिकायत के उत्सव में शामिल कर लेंगे। एक महीने के अंदर आपको बड़ी चतुराई के साथ इस बेहद गर्म विरोध प्रदर्शन में शामिल कर लिया जायेगा। कोशिश करें कि आप इस तरह के जाल में न फंसे। Warsaw School of Social Psychology  का एक अध्ययन यह दिखाता है, कि नकारात्मक मन और भावनाएं आपके जरूरतों की पूर्ति, आपके आदर्श, और आपकी सकारात्मक भावनाओं में कमी लाती हैं।
 
7.सकारात्मकता लाने में सांसों का इस्तेमाल करें :-

हमारी साँस विशेष रूप से हमारी भावनाओं से जुडी हुई है। क्या आपने गौर किया है कि जब हम किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो अपनी सांसो को रोक कर रखते हैं?और क्या अपने महसूस किया है कि, जब हम क्रोध करते हैं, तो हमारी साँस बदल जाती है। हमारी साँस हमारी भावनाओं के अनुसार बदल जाती है। इसी प्रकार अपनी सांसो का इस्तेमाल करके अपनी सोच का तरीका भी बदल सकते हैं।  जब भी आप फ्री हों-दस बार लम्बी और गहरी साँस लीजिये। आपको अच्छा लगेगा।
 
8.बुरे समय (आपदा) में भी सच्ची बातों पर ध्यान दीजिये:

जब मीडिया में चारो तरफ नफरत और क्रूरता फैली हो तब विश्वास और सकारात्मक बातें सोचना बहुत कठिन होता है। आपदा, युद्ध, और दर्दनाक अनुभव की घटनाओं में झूठी संवेदना और अपनापन दिखाने वाली खबरों की बजाय हमें सच्ची खबरों को देखना सीखना होगा।
 
9.किसी समस्या के साथ उसका समाधान भी खोजिए:

सकारात्मक रहने का मतलब ये नहीं कि आप समस्याओं के प्रति जागरूक ही ना हों। रचनात्मक व्यक्ति के पास किसी भी समस्या को सुलझाने का हल होता है। जब आप अपने आस -पास की किसी समस्या को उठायें तो उसके समाधान का प्रस्ताव पर भी आपका प्रयास होना चाहिए। समस्या आने पर उससे परेशान होने की बजाय ये समस्या किस प्रकार हल हो सकती है, इसका प्रयास कीजिये।
 
10.किसी को ख़ुशी दीजिये:

क्या अपने कभी किसी गरीब या बेसहारा व्यक्ति की मदद की है, या उनके बारे सोचा है? हममे से अधिकांश उन्हें देखकर बुरा सोचते है। हमें अपनी समाज के प्रति जिम्मेदारी को समझना चाहिए। प्रति दिन किसी एक व्यक्ति को थोड़ी ख़ुशी देने का उद्देश्य बनाइये, और देखिये इससे आपको कितनी ख़ुशी मिलेगी। इससे आपको आस-पास रहने वाले सामान्य लोगों के प्रति आपकी बुरी मानसिकता को बदलने में मदद मिलेगी।

रुख, रवैया अंग्रेजी में जिसे ऐटिट्यूड कहा जाता है। आखिर है क्या यह ऐटिट्यूड? अक्सर ऐटिट्यूड को नकारात्मक अंदाज में ही देखा जाता है। मसलन अगर कोई अकड़ू है, ‍कम बात करता है या सिर्फ अपने काम से ही मतलब रखता है तो लोग कहते हैं कि उसमें ऐटिट्यूड है। सही मायने में ऐसा नहीं है, अगर डिक्शनरी में ऐटिट्यूड की परिभाषा देखें तो हम पाएंगे कि जिंदगी के प्रति देखने का एक जरिया है ऐटिट्यूड। सोचने, समझने और बर्ताव करने का तरीका है ऐटिट्यूड।   

अच्छे-बुरे के आधार पर ही ऐटिट्यूड दो तरह का होता है सकारात्मक और नकारात्मक। अत: ऐटिट्यूड को सिर्फ नकारात्मकता के लिए समझना सही नहीं है।   
किसी भी काम की सफलता के पीछे हमारी सोच, उस काम के प्रति हमारे रवैये पर ही निर्भर करती है। या यूं कहें कि हमारे ऐटिट्यूड पर ही निर्भर करती है। हम उस काम को किस नजरिए से देखते हैं यही बात हमारी सफलता-असफलता का कारण होती है। ठीक इसी तरह अपने अच्छे करियर के लिए जरूरी है कि हम उसकी शुरुआत के समय उसके प्रति अपने रुख को निर्धारित करें।  

सिर्फ अपना करियर प्लान कर लेना ही सब-कुछ नहीं है। ‍करियर प्लान के साथ अगर हम उसके प्रति अपने सकारात्मक रवैये को नहीं अपनाते हैं तब यह गलती हमारे ‍करियर प्लान को क्षीण बना देगी और हम अपने लक्ष्य तकनहीं पहुंच पाएंगे। किसी भी करियर में सफलता अर्जित करने के लिए जरूरी है कि हम उसके प्रति सकारात्मक रुख के महत्व को समझें।  
अपने काम के लिए आप ऐटिट्यूड के रूप में अपने आदर्शों को निर्धारित कर सकते हैं जो लक्ष्य पाने के लिए हमेशा आपका मार्गदर्शन करते रहें। आप नीचे दिए तीन आदर्शों को करियर के प्रति अपने ऐटिट्यूड के रूप में निर्धारित कर सकते हैं। 

1. गर्व (प्राइड)

हालांकि यह एक बड़ा ह‍ी जटिल शब्द है, लेकिन इसे अहंकार के रूप में न लेते हुए अपने आत्म सम्मान के रूप में लिया जाना चाहिए। तभी आप अपने काम को नाज करने लायक बनापाएंगे। वैसे भी गर्व और घमंड के बीच बहुत महीन पर्त है। 

2 उत्साह (पैशन)

किसी भी करियर को महज थोड़ी सी इच्छा के कारण स्वीकारना अक्लमंदी का काम नहीं है। ऐसा करने से आगे मुश्किल दौर में आप उस करियर मेंअपने आप को साबित नहीं कर पाएंगे और न ही आपकी पदोन्नति हो पाएंगी। करियर में आगे और आगे जाने के लिए जरूरी है उसके प्रति प्रबल इच्छा, रूचि। अपने काम के प्रति आपकी दीवानगी, आपका पैशन ही आपको उस क्षेत्रमें असीम सफलता दिला सकता है। इससे काम के प्रति आपका उत्साह पूरे समय बना रहेगा। 

3 प्रबल विश्वास (बिलीफ)

काम के प्रति इस दीवानगी के लिए जरूरी है खुद पर यकीन और आपकी गहरी आस्था। अगर जीवन में आपने कुछ मानक तय किए हैं और आपको अपनी सफलता का विश्वास है तो फिर आप अपने लक्ष्य की ओर जोश और जुनून के साथ बढ़ेंगे। आपको अपने आप पर पूरा विश्वास रखना होगा कि आप यह काम बखूबी कर सकते हैं और आपमें प्रतिभा कीकोई कमी नहीं है। आपकी यही सोच आपको उस लक्ष्य तक पहुंचाएगी जिसका ख्वाब आपने देखा है।

Positive Attitude
Importance of Positive Attitude

“The greatest discovery of my generation is human beings can alter their lives by altering their attitudes of mind”
William James

सकारात्मक दृष्टिकोण चमत्कार कर सकते हैं यह दूसरों के लिए संभवतः असंभव है जो संभवतः दूसरों के लिए संभव है। सकारात्मक दृष्टिकोण बीज है जिसमें से सकारात्मक लक्षण, जो सफलता के लिए जरूरी हैं आगे बढ़ते हैं। यह सकारात्मक रवैया फिर से है जो सकारात्मक लक्षणों के पौधे को पानी और फ़ीड करता है।

आपका मन विचारों और विचारों की एक मशीन है अगर आप इसे सकारात्मक, प्रेरक और प्रेरक विचारों से नहीं भरते हैं, तो यह नकारात्मक विचारों के जंगल में बदल जाएगा। आपका मन एक खूबसूरत बगीचा है, यदि आप उसमें खूबसूरत फूलों के पौधों के पौधे को पौधे और पौधों का पोषण नहीं करते हैं, तो यह जंगली लता, झाड़ियों और कांटेदार पौधों की गड़बड़ी में बदल जाएगा।

आपका मन विचारों और विचारों से बाहर एक विशाल फैक्टरी आकर्षक है। आप इस कारखाने के पर्यवेक्षक हैं आपके बेक और कॉल में आपके दो फोरमैन हैं। श्रीमान और श्रीमान। जैसे ही आपका कारखाना एक महान विचार पैदा करता है, आप दोनों फोरमैन को अपने निष्पादन पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित करते हैं। उन दोनों के नाम के रूप में जाना, तदनुसार सुझाव देते हैं। यह आपकी निर्भर है कि आप उनकी सलाह का पालन करें या नहीं। यदि आप 'मिस्टर की सलाह का पालन करना शुरू करते हैं नहीं 'अधिक से अधिक, आप एक नकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना शुरू करते हैं एक समय आता है जब 'मिस्टर नहीं 'ने आपके विचार प्रक्रिया पर पूरा नियंत्रण लिया है एक समय तक और तब आता है जब आपके भीतर एक महान विचार झुकने से पहले, 'श्री नं।' आती है और इसे आकार से बाहर खींचती है, इतना कि 'मिस्टर नहीं 'आप पर एक पूरा नियंत्रण लेता है

यदि सफलता है तो क्या वास्तव में आप को आकर्षित करती है, और निश्चित रूप से हर कोई करता है, तो आपको 'मिस्टर के साथ एक गहन सहयोग करना चाहिए। हाँ ', आपका सकारात्मक फोरमैन
 मेरी पीढ़ी की सबसे बड़ी खोज मनुष्य मनुष्यों के मनोवृत्ति को बदलकर अपने जीवन को बदल सकती है
प्रसिद्ध फ्रांसीसी फिलॉसॉफ़र ब्लेज़ पास्कल को एक बार किसी के द्वारा संपर्क किया गया था। आगंतुक ने कहा, अगर मुझे आपका दिमाग था, तो मैं एक बेहतर व्यक्ति बनूंगा। पास्कल ने उत्तर दिया, एक बेहतर व्यक्ति बनो और आपके दिमाग होंगे।
हमारे दृष्टिकोण के अधिकांश हमारे प्रारंभिक वर्षों के दौरान आकार का है। मुख्य रूप से तीन 'ई' कारक हैं जो हमारे दृष्टिकोण का निर्धारण करते हैं- पर्यावरण, अनुभव और शिक्षा एक सकारात्मक माहौल में, एक सीमांत कलाकार के बाहर रखा जाता है। एक नकारात्मक वातावरण में, एक अच्छा कलाकार का आउटपुट नीचे जाता है। इसी तरह, अगर आपके पास व्यक्ति के साथ सकारात्मक अनुभव होता है, तो उसके प्रति हमारा दृष्टिकोण सकारात्मक और इसके विपरीत होता है। और अंत में, शिक्षा को न केवल सिखाना चाहिए कि कैसे जीवित करना है, बल्कि यह कैसे जीना भी।त कुछ है 
अकेले नकारात्मकता की अनुपस्थिति किसी व्यक्ति को सकारात्मक नहीं बनाती है। सकारात्मक दृष्टिकोण वाले लोगों में कुछ व्यक्तित्व लक्षण हैं जो पहचानना आसान है। वे देखभाल, विश्वास, रोगी और विनम्र हैं उनके पास स्वयं और दूसरों की उच्च अपेक्षाएं हैं वे सकारात्मक परिणामों की आशा करते हैं

दूसरी तरफ, एक नकारात्मक दृष्टिकोण वाले लोग दोस्ती, नौकरियां और रिश्तों को रखने में कठिन समय आते हैं। वे घर पर एक नकारात्मक वातावरण बनाते हैं और काम करते हैं और समाज की जिम्मेदारी बन जाते हैं। वे अपने नकारात्मक व्यवहार को उनके आस-पास और भविष्य की पीढ़ियों तक दूसरे के पास भी देते हैं।

हमारे प्रारंभिक वर्षों के दौरान सकारात्मक दृष्टिकोण प्राप्त करने के लिए यह बहुत आसान और बेहतर होगा। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि अगर हम नकारात्मक दृष्टिकोण प्राप्त करते हैं, चाहे इच्छा के द्वारा या डिफ़ॉल्ट रूप से, हम इसके साथ अटक जाते हैं। हम इसे बदल सकते हैं, हालांकि यह थोड़ा मुश्किल होगा। इसके लिए आपको अतीत से दूर जाना होगा अपने आप को धूल, मुख्यधारा में वापस आ जाओ अपने सपनों को एक साथ रखें और आगे बढ़ें। सकारात्मक, सच्चे, ईमानदार और अच्छे, सकारात्मक विचारों के बारे में सोचकर आप सकारात्मक स्थिति में रहेंगे। इसके अलावा, एक को निम्नलिखित चरणों का सावधानीपूर्वक अभ्यास करना होगा
जब एक बुलून जारी होता है तो उसके रंग या आकृति के कारण नहीं बढ़ जाता है, जो कि अंदर होता है वह इसे ऊपर उठता है। वही आवेदन हमारे जीवन में पाया जा सकता है यह उस गिनती के अंदर है हमारे अंदर जो चीज हमें आगे बढ़ती है वह हमारा दृष्टिकोण है।

विलियम जेम्स ने एक बार कहा:

फोकस बदलें, सकारात्मक के लिए देखो हमें अच्छे शोधकर्ता बनने की जरूरत है, हमें ज़िंदगी में सकारात्मक पर ध्यान देने की जरूरत है। आइए एक व्यक्ति या परिस्थिति में क्या सही है, इसके बारे में जानने के बजाय, जो गलत है उसे ढूंढने के लिए शुरू करें। हमारे कंडीशनिंग के कारण, हम गलती को खोजने के लिए अभ्यस्त हैं और गलत चीज़ों की तलाश में हैं जो हम सकारात्मक तस्वीर देखने के लिए भूल जाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति और हर स्थिति में कुछ सकारात्मक है कभी-कभी हमें सकारात्मक देखने के लिए गहराई तक जाना पड़ता है क्योंकि यह स्पष्ट नहीं हो सकता है इसके अलावा, हम अन्य लोगों और परिस्थितियों में जो गलत है, हम यह भूलने के लिए भूल जाते हैं कि हम क्या चाहते हैं। किसी ने एक बार कहा था कि एक बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही है।

अब इसे करने की आदत बनाओ एक पूरा काम पूरा और energizing है। एक अधूरी काम एक टैंक से रिसाव की तरह ऊर्जा को नाल देती है। यदि आप सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना और बनाए रखना चाहते हैं, तो वर्तमान में रहने की आदत डालें और अब इसे करें। वाक्यांश 'अब इसे करो' वाक्यांश जानें और विलंब बंद करो

कृतज्ञता का एक दृष्टिकोण विकसित करें अपने आशीर्वादों पर ध्यान न दें, आपकी परेशानी नहीं। हम उन चीजों के बारे में शिकायत करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं जिनके पास हमारे पास नहीं है कि हम जो चीजें हैं उनके अधिकार खो देते हैं। के लिए आभारी होना बहुत कुछ है। लेकिन एक ही टोम में, इसका मतलब यह नहीं है कि आप बेहोश हो जाते हैं, एक तस्करी। यह केवल ऊर्जा की रक्षा के लिए है, जो कि आप अपनी परेशानियों के बारे में शिकायत करते हैं।

सकारात्मक आत्म-सम्मान बनाएं आत्मसम्मान हम खुद के बारे में सोचने का तरीका है। जब हम अंदर अच्छा महसूस करते हैं, तो हमारा प्रदर्शन बढ़ जाता है, रिश्तों को घर और काम पर दोनों में सुधार होता है। दुनिया अच्छे दिखती है भावना और व्यवहार के बीच एक सीधा संबंध है यदि आप जल्दी से सकारात्मक आत्मसम्मान बनाना चाहते हैं, तो सबसे तेज़ तरीके से एक ऐसा है जो दूसरों के लिए कुछ करना है जो आपको नकद या दयालु में चुका नहीं सकते हैं। मनुष्य के रूप में, हम सभी को प्राप्त करने और लेने की आवश्यकता है। लेकिन उच्च आत्म सम्मान के साथ एक स्वस्थ व्यक्तित्व एक है जिसे न केवल लेने की आवश्यकता है बल्कि उसे देना भी है।
नकारात्मक प्रभाव से दूर रहें यदि आप एक ईगल की तरह चढ़ना चाहते हैं, तो आपको ईगल के तरीके सीखना होगा। यदि आप प्राप्तकर्ताओं से संबद्ध हैं, तो आप एक बन जाएंगे। यदि आप विचारकों के साथ संबद्ध हैं, तो आप एक बन जाएंगे यदि आप गवर्स से संबद्ध होते हैं, तो आप एक बन जाएंगे यदि आप शिकायतकर्ताओं से संबद्ध होते हैं, तो आप एक बन जाएंगे। जब भी लोग जीवन में सफल होते हैं, छोटे लोग उन पर दरारें लेते हैं और उन्हें नीचे खींचने की कोशिश करते हैं। छोटे लोगों से लड़ने के लिए, आपको अपने स्तर पर उतरना होगा। नकारात्मक लोगों को आपको नीचे खींचने न दें। जब आप छोटे लोगों से लड़ने से इंकार करते हैं, तो आप जीत जाते हैं। याद रखें, किसी व्यक्ति के चरित्र का न केवल कंपनी द्वारा वह निर्णय लेता है, बल्कि कंपनी द्वारा भी वह टालती है। उन चीजों को पसंद करने के लिए जानें, जिन्हें करने की आवश्यकता है। कुछ चीजें करने की ज़रूरत है कि क्या हमें उन्हें पसंद है या नहीं उदाहरण के लिए, माता अपने जवानों की देखभाल करते हैं वे मज़ेदार और गेम्स नहीं हो सकते हैं, और ये दर्दनाक भी हो सकते हैं। लेकिन अगर हम कार्य को सीखना सीखते हैं, तो असंभव संभव हो जाता है। किसी ने कहा, जो आवश्यक है उसे करना शुरू करो, तो क्या संभव है, और अचानक आप असंभव कर रहे हैं।

एक सकारात्मक के साथ अपना दिन प्रारंभ करें सुबह में कुछ सकारात्मक बात पढ़ें या सुनो। एक अच्छी रात की नींद के बाद हम आराम कर रहे हैं और हमारे अवचेतन ग्रहणशील है। यह दिन के लिए टोन सेट करता है, और हमें हर दिन एक सकारात्मक दिन बनाने के लिए सही मन में रखता है। परिवर्तन के बारे में लाने के लिए, हमें सचेत प्रयास करने की जरूरत है और हमारे जीवन के सकारात्मक विचारों और व्यवहार का हिस्सा बनाने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। जब तक वे एक आदत बनने तक सकारात्मक विचार रखते हुए अभ्यास करें
अंत में, यदि आप अपना जीवन बदलना चाहते हैं, तो आपको तत्काल आरंभ करने की ज़रूरत है और इसे पूरी तरह से करना चाहिए।

सकारात्मक व्यवहार और सफलता
POSITIVE ATTITUDE AND SUCCESS

सकारात्मक दृष्टिकोण आशा देता है सकारात्मक दृष्टिकोण आपको आश्वासन देता है सकारात्मक दृष्टिकोण अंधेरे में प्रकाश को देखने का एक मानसिक लक्षण है। यदि आप सकारात्मक स्वभाव के व्यक्ति हैं तो आप हमेशा जीवन के उज्ज्वल पक्ष देखते हैं। ऐसा क्यों है?
यदि आप कहते हैं, मैं कर सकता हूँ, आप करेंगे
यदि आप कहते हैं, मैं नहीं कर सकता, आप कभी नहीं करेंगे

ऐसा नहीं है क्योंकि चीजें मुश्किल हैं कि हम हिम्मत नहीं करते;
ऐसा इसलिए है क्योंकि हम हिम्मत नहीं करते कि वे मुश्किल ... .. सेनेका
जब ज्यादातर लोगों का कहना है कि कांच आधा खाली है, तो कुछ लोग इस बात पर जोर देते हैं कि कांच आधा भरा है।
जब एक कार्य दो व्यक्तियों को सौंपा जाता है, उनमें से एक का कहना है कि यह मुश्किल है और नहीं किया जा सकता है, दूसरे व्यक्ति का कहना है कि इसे और अधिक प्रयास की आवश्यकता है और किया जा सकता है।

जब सिकंदर के थके हुए सेना ने महान ने सिंधु से आगे बढ़ने से इनकार कर दिया, तो अब कोई असंभव काम करना कह रहा था, अलेक्जेंडर ने कहा कि सिंधु को पार किया जा सकता है और सिंधु परे राजा पराजित हो सकते हैं और उसने किया था।
जब नेपोलियन ने आल्प्स को पार करने के लिए अपनी सेना का आदेश दिया, तो उन्होंने कहा यह असंभव था नेपोलियन ने जवाब दिया, असंभव शब्द मूर्खों के शब्दकोश में लिखा है।

जवाब सकारात्मक दृष्टिकोण है

सफलता और सकारात्मक दृष्टिकोण के बीच एक अंतरंग संबंध है। कोई भी कभी सफल नहीं हुआ है, उसकी यात्रा में कभी भी 'काफी' ने कहा है कोई भी कभी भी सफल नहीं रहा है, सफलता के लिए अपनी यात्रा में कभी भी- आशा खो चुकी है। कोई भी जिसने किसी कार्य के लिए 'असंभव' कहा है, वह संभवतः इसे संभव बनाने के लिए चले गए हैं। लेकिन इसके विपरीत अक्सर यह सच है:
गीता रवैया बोलती है समीक्षकों ने गीता द्वारा लिखी रवैये को समझने में असफल रहे हैं। गीता उच्चतम पुण्य के रूप में गैर-संलग्न रवैया को कायम करती है। गैर-अनुलग्न क्रिया में निम्न लाभ हैं
आप पक्ष के डर के बिना काम कर सकते हैं 
आप केवल काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं
आपका प्रदर्शन स्तर उच्च है
आप अपने काम में पूरी तरह से अवशोषित कर रहे हैं
आपके लिए कोई बाधा या व्याकुलता नहीं है
आपकी सफलता की संभावना बहुत अधिक है

आलोचकों ने गैर-लगाव की व्याख्या मानवीय रूप से संभवतः कुछ नहीं की है। उनके अनुसार कोई भी प्रेरणा के बिना काम कर सकता है। लेकिन यह पश्चिमी विद्वानों का विचार है। भारतीय लोकाचार काफी भिन्न है इसके अलावा, उपरोक्त गैर-लगाव की व्याख्या, भ्रामक है। गैर-अनुलग्नक का अर्थ केवल आंतरिक मूल्य के लिए अपना काम करने का अर्थ है जो इसे करने में निहित है और इसके साथ जुड़े इनाम या पारिश्रमिक के कारण नहीं। यह काफी तार्किक है 'काम' केवल एक चीज है जिसे आप नियंत्रण करते हैं। अपने काम से जुड़े फलों पर आपका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है यह रवैया आपको अपनी प्रगति में विफलता की अनुमति देता है। यह रवैया आपको अपने मन की शांति देता है। यह रवैया आपको संघर्ष और कठिन परिस्थितियों में भी जाने की सुविधा देता है यह वास्तव में रवैया है जो सभी सफल लोगों के पास है।

Darcy ई। गिबन्स कहते हैं, सफलता सिर्फ दृष्टिकोण का मामला है“Success is just a matter of attitude” एक सूक्ष्म रूप से प्रकृति की प्रकृति को निजी जीवन से बचने के लिए उद्देश्य धारणा और सोचा की दुनिया में लम्बा होता है।

दुनिया में सभी महान काम तब प्राप्त किए गए हैं जब पुरुष अपने व्यक्तिगत आत्म और अहंकार की संकीर्ण सीमाओं से परे चले गए हैं। यह काम करने का रवैया होना चाहिए।

किसी संगठन की स्थापना या राष्ट्रों की स्वतंत्रता या यहां तक कि महान आविष्कार या उच्च और विकसित सामाजिक मूल्यों के उभरने के लिए आंदोलनों की तरह किसी भी महान कार्य के बारे में सोचो। ऐसे सभी महान कर्मों में जबरदस्त बलिदान शामिल है और शक्ति होगी। वे संभव नहीं होते यदि नेताओं और दूरदर्शिता स्वार्थी, अहंकारी और उनके व्यक्तिगत लाभ में शामिल थी।

रवैया और प्रभावशीलता सफलता के दो स्तंभ हैं। शुरुआत में हमने रवैया के बारे में कुछ बात की थी आइए हम रवैया पर थोड़ी अधिक विस्तारित करें।
ऐसा क्यों है कि जब एक ही विषय को दो प्रोफेसरों द्वारा सिखाया जाता है, तो छात्रों को एक और दूसरा नहीं? जवाब रवैया है

ऐसा क्यों है कि जब कोई समस्या उत्पन्न होती है तो एक आदमी झगड़ा करना शुरू कर देता है, लड़ता है, लेकिन एक ही समस्या का सामना करना पड़ता है, दूसरे आदमी समस्या को हलचल से बाहर निकालता है।
ऐसा क्यों है कि जब दो छात्रों का प्रदर्शन खराब होता है, तो एक को सुधारना शुरू हो जाता है, लेकिन दूसरा आगे खराब होता है? जवाब रवैया है
आपका रवैया उस योग का कुल योग है जो आप एक व्यक्ति के रूप में और एक व्यक्ति के रूप में हैं

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