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प्राचीन काल से ही इंसान चित्रों के माध्यम से अपने विचार, व्यवहार, इतिहास एवं सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति बयां करता रहा है। कोई त्रासदी हो या फिर खुशी का मौका, चित्रों के माध्यम से ही उसे अच्छी तरह व्यक्त किया जा सकता है और सोशल मीडिया के आज के समय में तो फोटो का अपना अलग ही महत्व है। आज फोटो लेने के लिए अत्याधुनिक कैमरे उपलब्ध हैं लेकिन प्राचीन काल में लोग पत्थरों, घर की दीवारों, पेड़ों, पत्तियों और अन्य जगहों पर अपनी कला का प्रदर्शन करते थे। फिर बाद में कैमरे का प्रयोग करके फोटो लिया जाने लगा। आज वर्ल्ड फोटॉग्राफी दिवस के मौके पर हम चित्रों की पत्थरों, पेड़ों से लेकर कैमरे तक की यात्रा को पढ़ेंगे...

फोटॉग्राफी की शुरुआत

फोटॉग्राफी का श्रेय फ्रांस के निसेफोर नीप्स और लुई जैक मांडे डगेर को जाता है। 1824 में निसेफोर नीप्स ने हेलियोग्रफी नाम के पहले फोटॉग्राफी प्रोसेस का आविष्कार किया। उस समय पूरे फिल्मिंग प्रोसेस में कई दिन लगते थे। बाद में नीप्स ने अपने साथ लुई जैक मांडे डेगर को मिलाया और 1832 में दोनों ने मिलकर पूरी फिल्मिंग प्रक्रिया के समय को कम करके एक दिन कर दिया।

19 अगस्त को ही वर्ल्ड फोटॉग्राफी डे क्यों?

दुनिया भर में हर साल 19 अगस्त को वर्ल्ड फोटॉग्राफी डे मनाया जाता है। आइये इसके पीछे का कारण जानते हैं। 1833 में नीप्स की मौत हो गई जिसके बाद 1838 में डगेर ने फोटॉग्राफी का अपना प्रोसेस डिवेलप किया जिसे डगेरोटाइप के नाम से जाना गया। इस प्रक्रिया में फिल्मिंग का पूरे प्रोसेस में मुश्किल से 30 मिनट्स लगते थे। 9 जनवरी, 1839 को फ्रेंच अकैडमी ऑफ साइंसेज ने डगेरोटाइप प्रोसेस की घोषणा की। 19 अगस्त को फ्रांसीसी सरकार ने इसका पैटंट खरीद लिया और इस आविष्कार को दुनिया के लिए एक उपहार बताया। तब से 19 अगस्त को वर्ल्ड फोटॉग्राफी डे मनाया जाने लगा।

पहला कलर फोटोग्राफ

पहला कलर फोटोग्राफ 1861 में थॉमस सतन ने लिया। यह तीन ब्लैक और वाइट फटॉग्राफ का सेट था जिसे लाल, हरे और नीले फिल्टर्स से लिया गया था।
पहला डिजिटल फोटोग्राफ 1957 में लिया गया था। उसके 20 साल बाद कोडक कंपनी के इंजिनियर ने पहला डिजिटल कैमरा आविष्कार किया।

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