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जोऊ कुन्फाई कंपनी आज टेस्ला, एप्पल, सैमसंग जैसी कंपनीज के लिए ग्लास बनाती है


लेंस टेक्नोलॉजी की फाउंडर व सीईओ जोऊ कुन्फाई, 7.4 बिलियन डॉलर की नेट वर्थ के साथ पिछले वर्ष दुनिया की सबसे अमीर महिला मानी गई थीं। पूर्वी चीन में जन्मीं जोऊ का बचपन बहुत आसान नहीं था। वे जब पांच साल की थीं, तभी उनकी मां का देहांत हो गया और एक एक्सिडेंट में उनके पिता की आंखें चली गईं। इन्हीं कारणों से उन्हें खुद को कम उम्र में ही संभालना पड़ा। वे बताती हैं कि उस समय उनके सामने सबसे बड़ा प्रश्न होता था कि वे खुद के लिए रोजाना का खाना कैसे जुटा पाएंगी।


ऐसी विभिन्न समस्याओं के चलते उन्हें कमाने की जरूरत महसूस हुई, तो 16 साल की उम्र में ही हाई स्कूल की पढ़ाई छोड़कर वे साउथ चाइना के एक शहर में घड़ियों की लेंस फैक्ट्री में काम करने लगीं। वहां काम करते हुए वे कुछ सालों में मैनेजर बन गईं। वर्ष 1993 में जोऊ ने अपने परिवार के साथ बचत के कुछ पैसों से घर पर ही एक स्क्रीन प्रिंटिंग वर्कशॉप की शुरुआत की। कुछ सालों बाद उसी घर में उन्होंने अपनी पहली कंपनी की शुरुआत भी की। इस तरह लगभग दस साल बाद उन्होंने वॉच लेंसेज की एक फैक्ट्री शुरू की जिसमें एक हजार लोगों को रोजगार दिया। वर्ष 2003 में सप्लाई के लिए मोटोरोला ने उनसे कॉन्ट्रैक्ट किया। आज जोऊ, लेंस टेक्नोलॉजी के माध्यम से टेस्ला, एप्पल, सैमसंग जैसी बड़ी कंपनीज के लिए ग्लास बना रही हैं। जोऊ के अनुभवों से नए आंत्रप्रेन्योर्स सफल होने के लिए बहुत कुछ सीख सकते हैं।

किसी भी परेशानी के लिए तैयार रहें

- जोऊ मानती हैं कि एक आंत्रप्रेन्योर को किसी भी परेशानी के लिए तैयार रहना और कॉम्पिटीशन की भावना रखते हुए मानसिक रूप से मजबूत बने रहना चाहिए। यह तभी हो सकता है जब आपको मार्केट और कॉम्पिटिटर्स के बारे में पता हो। पूरी तैयारी रखें, लेकिन फेलियर्स के लिए तैयार रहें और बैकअप प्लान्स रखें। जोऊ खुद को रिजेक्शन के लिए मानसिक तौर पर तैयार रखती थीं।

लर्निंग जारी रखे

- जोऊ के अनुसार कोई भी आपको सिर्फ इसलिए प्रॉडक्ट का प्राइस नहीं देता कि आप अच्छे हैं बल्कि इसलिए कि आपकी मार्केट के बारे में जानकारी कितनी अच्छी है और आपने खुद को कितना बेहतर बनाया हुआ है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बिजनेस के दौरान पार्ट टाइम कोर्सेज किए जिससे कि वे अकाउंटिंग, कम्प्यूटर ऑपरेशन्स और कॉमर्शियल ट्रक ड्राइवर लाइसेंस हासिल कर सकीं। उनका मानना है कि सीखना जारी रखकर ही आप आगे बढ़ सकते हैं।

कभी हारें नही

- बहुत लोग खुद के कमजोर होने की वजह असफलताओं को मानते हैं जबकि सफलता की पहली शर्त ही यह है कि आप असफलताओं के बावजूद काम करते रहें। अगर आप आधे रास्ते पर ही वापस आना चाहेंगे, तो आपके पास दोबारा शुरू करने का साहस नहीं होगा, लेकिन यदि मुश्किलों का सामना करते रहे, तो जरूर सफल होंगे।

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